सिंधु नदी जल संधि-सही या गलत
निर्णय कितना भी सही हो अथवा कितना भी गलत दोनों में ही सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्ष होते है,निर्भर इसपे है कि कौन व्यक्ति अथवा व्यक्ति समूह किस प्रकार किसी विन्दु को देखता और समझता है,किन्तु एक बात र्स्वीकार की जनी चाहिए कि सकारात्मक और नकारात्मक बातो में कौन सा अधिक प्रबल और लाभदायी है और उसके लिए नकारात्मकता वाले विंदु को नजरअंदाज किया जाना चाहिए lकिन्तु ये कार्य इतना सरल नहीं क्योंकि मामला अंतरास्ट्रीय भी है और देश के सवा सौ करोण लोगो के हितों से जुड़ा हुआ है l इससे जटिलता और मजबूत हो जाती है ,सम्पूर्ण देश और भूभाग की शुरक्षा का प्रथम दायित्व सरकार का ही है किंतु नागरिक हित सरकारी निर्णयो को प्रभावित करते हैं और यहाँ मामला यही उचित माना जाता है कि यदि एक की कीमत पर सौ के हितों को ऊर्जा मिलती है तो फिर उस एक के हित भी उन्ही सौ से ही जोड़ कर देखे जाते हैं lवर्त्तमान के ज्वलंत मुद्दे की व्याख्या स्वयं के उपलब्ध तथ्यों एवं सोच के हिसाब से की गई है जो कि पूर्णतः व्यक्तिगत हैं अन्य व्यक्तियों एवं सरकार की सोच अलग हो सकती है l मेरा प्रयास बस स्वयं की बात को पटल पर रखना ही है l
सिंधु जल संधि को भंग करने के पश्चात कौन - कौन सी परिस्थितियां उत्त्पन्न हो सकती हैं इसका बस अनुमान ही लगाया जा सकता है अतःइसपर में अपने निजी विचार रख रहा,चुकी देश की जिम्मेदारी एक काबिल हाथो में है, इस बात पर मुझे कोई संदेह नहीं, चाहे वो प्रधानमन्त्री हों अथवा सेना प्रमुख या रक्षा मंत्री सभी नेतृत्वकर्ता बेहद अनुभवी एवं अपने अधिकार क्षेत्र के उत्कृष्ट लोग है, ख़ास कर अजीत डोबाल साहेब जिन्हें में वर्त्तमान की विदेश राजनीति का चाणक्य मानता हूँ l
मूल विषय
सिंधु नदी का उद्गम श्रोत मानसरोवर झील है जो कि कैलास पर्वत (तिब्बत-चीन) के निकट ही है अथवा कहे कि ये झील उसी पर्वत श्रेणी पर है,एक अन्य बात ये है कि भारत की एक सबसे विशाल जल बहाव क्षेत्र वाली नदी ब्रह्मपुत्रा भी इसी मानसरोवर झील से निकलती है,जो भारत के अरुणाचल प्रदेश असम को संचित करती हुई बांग्लादेश में प्रवेश करती है l
google.com सिंधु नदी जो मानसरोवर झील से निकल कर उत्तर पश्चिम की और बहती हुई कश्मीर में प्रवेश करती है फिर भारत के कुछ अन्य भागों से होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश करती है l
इसके अतिरिक्त मानसरोवर झील से पूर्व की और बहने वाली नदी #ब्रह्मपुत्र ( जिसे चीन में #सांगपो नाम से जाना जाता है ) अरुणाचल प्रदेश से भारत में प्रवेश करती है ,अरुणाचल में इसके दो बहाव क्षेत्र लोहित और दिबांग जहां पर मिलते है वहां से ये नदी ब्रह्मपुत्र कही जाती है और ये क्षेत्र है भारत का असम राज्य जहां ये नदी असम के एक छोर से दुसरे छोर की दूरी तय करते हुए अंत में गंगा से मिलती है और आगे इसे बांग्लादेश में पद्मा कहा जाता है l
ये है इन दो नदियों की भौगोलिक स्थिति जो चीन (तिब्बत) से होकर भारत भूमि में प्रवेश करती है जहां तक सिंधु नदी और पाकिस्तान की बात है तो सिंधु नदी भी पाक के एक छोर से प्रवेश कर दक्षिण के दूसरे छोर से गुजरते हुए अरब सागर में मिल जाती है,ये नदी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है l
इस नदी की अहमियत की चर्चा प्राचीन ग्रंथों में मिलती है , आर्यो ने वेद और पुराण में इस नदी की प्रशंसा करते हूँए इसे पूज्य स्थान दिया है और लिखा है कि इतनी विशालकाय नदी उन्होंने आज तक नहीं देखी,( सिंधु विश्व की 22वी सबसे बड़ी नदी है एवं एशिया की प्रथम सबसे बड़ी नदी ) मान्यता रही है कि आर्य यूरोप के अल्प्स पर्वत के पास से आये,
(यद्यपि आधुनिक शोधों ने इस तथ्य पर गम्भीर प्रश्न खड़े किये हैं )
पाकिस्तान भी एक कृषि प्रधान देश है तो उसकी कृषि में सिंधु नदी और मानसून की प्रमुख भूमिका है और यदि इस नदी के बहाव को पाकिस्तान जाने से रोक लिया गया अथवा बहाव क्षेत्र को किसी अन्य सुरक्षित स्थान की और मोड़ दिया जाय तो निश्चय ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कृषि पर अभूतपूर्व हानि होगी कहा जाय कि ये पाक के कमर तोड़ने वाली रणनीति होगी,तो भी गलत नहीं होगा l सिंधु नदी पुरे पाकिस्तान से होते हुये अरब सागर में गिरती है इस लिए इसके बहाव का पूरा क्षेत्र पाक के महत्वपूर्ण नगरो से हो कर गुजरती है और यदि सिंधु जल संधि रद्द कर दें तो फिर इस नदी के आसपास के बड़े शहर सूखे के शिकार हो जाएगे और इसके साथ बलूच मुद्दे को और जोर शोर से उठाया गया तो पाकिस्तान की हालत न घर के न घाट के जैसी हो जाएगी l
अब इसके नकारात्मक पक्ष पर गौर करें-
१- अंतरास्ट्रीय मंच पर छवि को नुक्सान होगा जिस प्रकार की छवि भारत की अब तक रही है l
२- पाकिस्तान इस मुद्दे को तूल दे कर अपने लोगो के प्राकृतिक अधिकारों का हनन बता कर विश्व समुदाय की संवेदनाये प्राप्त कर सकता है जिससे अंतरास्ट्रीय झुकाव जो आज भारत की अधिक है,का भी नुकशान उठाना पड़ सकता है l
३- इस प्रकार पुरे विश्व में पाक को आतंकी राष्ट्र घोषित किये जाने की इम्मीदे ख़त्म हो सकती है l
४- सबसे बड़ी बात जो सबसे गंभीर स्थिति ला सकती है कि ऐसा होने के पश्च्यात पाकिस्तान अपने आका चीन की कदमो में सहयोव के लिए पहुचेगा, और मांग करेगा की चीन भी कुछ ऐसा ही निर्णय सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों पर ले जो कि पूर्ण रूप से चीन के अधिकार क्षेत्र है l
४- ये भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि ब्रह्मपुत्र को लेकर भारत और चीन के बीच कोई संधि समझौता नहीं है और न ही किसी अन्य देश से ही ब्रह्मपुत्र पर कोई संधि हो ,ऐसा भी नहीं l
अब यदि इन पक्षो में यदि सत्यता है,जीतनी कि जानकारी मेने जुटाई है,तो इनपर विचार जरूर किया गया होगा l
सरकार निर्भय हो कर कार्यवाही हेतु आगे बढे भारत माँ अब और लाल नहीं खोना चाहती अतः सरकार द्वारा इस मुद्दे पर लिया गया हर निर्णय स्वीकार किया जाना चाहिए एक मत से संगठित हो उसे अंजाम दिया गया तो ये एक और सकारात्मक पक्ष कि स्थिति होगी l
और गौर करें कि सरकार मध्यम मार्ग अपनाना चाहती है जिसके तहत हम संधि तोड़ेंगे नहीं बल्कि कश्मीर में इस नदी का उयोग भारी मात्रा में बिजली उत्पादन के कार्य में उपयोग में लाया जाएगा,और ऐसा हुआ तो शानदार कूटनीति का प्रयोग किया जाएगा ये एक ऐसा निर्णय होगा जोकि पिछली सरकारों ने इतिहास में पहके कभी नहीं लिया l
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मृदुल चंद्र श्रीवास्तव